Puja

Swarana Dwadeshi Vrat

2,000.00

  • मई 2026
  • Mo
  • Tu
  • We
  • Th
  • Fr
  • Sa
  • Su
  • 01
  • 02
  • 03
  • 04
  • 05
  • 06
  • 07
  • 08
  • 09
  • 10
  • 11
  • 12
  • 13
  • 14
  • 15
  • 16
  • 17
  • 18
  • 19
  • 20
  • 21
  • 22
  • 23
  • 24
  • 25
  • 26
  • 27
  • 28
  • 29
  • 30
  • 31

    Please Pick a Date

Description

भगवान श्रीहरि विष्णु अत्यंत दयालु हैं। वे ही नारायण, वासुदेव, शिव, कृष्ण, परमात्मा, ईश्वर, शाश्वत, हिरण्यगर्भ, अच्युत आदि अनेक नामों से पुकारे जाते हैं। उनकी शरण में जाने पर मनुष्य का परम कल्याण हो जाता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को वामन द्वादशी या वामन जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह व्रत 21 सितंबर 2018, शुक्रवार को मनाया जा रहा है।

प्राचीन धर्मग्रंथों के अनुसार इसी शुभ तिथि को श्रीविष्णु के अन्य रूप भगवान वामन का अवतार हुआ था। इस दिन को श्रवण द्वादशी भी कहते हैं। इस द्वादशी तिथि को श्रवण नक्षत्र पड़ने के कारण इस व्रत का नाम श्रवण द्वादशी पड़ा है। श्रीमद्भागवत के अनुसार इस तिथि पर भगवान वामन का प्राकट्य हुआ था।

जैन समुदाय में श्रवण द्वादशी व्रत का माहात्म्य बहुत अधिक माना गया है। इस व्रत पर सुहागिन महिलाएं अपने अखंड सुहाग तथा संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत रखकर मंगल-कामना करती हैं। जैन धर्म में इस व्रत को 12 वर्ष तक विधिपूर्वक किया जाता है तथा उसके उपरांत इसका उद्यापन किया जाता है।

इस दिन भगवान वासुपूज्य की पूजा, अभिषेक, स्तुति के साथ-साथ उनका मंत्र- ‘ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ब्लूं श्रीवासुपूज्य जिनेन्द्राय नम: स्वाहा’ अथवा ‘ॐ ह्रीं श्री वासुपूज्य-जिनेन्द्राय नम:’ का जाप करने का महत्व है, वहीं हिन्दू धार्मिक पुराणों तथा मान्यताओं के अनुसार इस दिन भक्तों को व्रत-उपवास करके भगवान वामन की स्वर्ण प्रतिमा बनवाकर पंचोपचार सहित पूजा करनी चाहिए।

Additional information

Number of Days

Number of Pandits

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Swarana Dwadeshi Vrat”

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Puja

Swarana Dwadeshi Vrat

2,000.00

  • मई 2026
  • Mo
  • Tu
  • We
  • Th
  • Fr
  • Sa
  • Su
  • 01
  • 02
  • 03
  • 04
  • 05
  • 06
  • 07
  • 08
  • 09
  • 10
  • 11
  • 12
  • 13
  • 14
  • 15
  • 16
  • 17
  • 18
  • 19
  • 20
  • 21
  • 22
  • 23
  • 24
  • 25
  • 26
  • 27
  • 28
  • 29
  • 30
  • 31

    Please Pick a Date

Category:

Description

भगवान श्रीहरि विष्णु अत्यंत दयालु हैं। वे ही नारायण, वासुदेव, शिव, कृष्ण, परमात्मा, ईश्वर, शाश्वत, हिरण्यगर्भ, अच्युत आदि अनेक नामों से पुकारे जाते हैं। उनकी शरण में जाने पर मनुष्य का परम कल्याण हो जाता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को वामन द्वादशी या वामन जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष यह व्रत 21 सितंबर 2018, शुक्रवार को मनाया जा रहा है।

प्राचीन धर्मग्रंथों के अनुसार इसी शुभ तिथि को श्रीविष्णु के अन्य रूप भगवान वामन का अवतार हुआ था। इस दिन को श्रवण द्वादशी भी कहते हैं। इस द्वादशी तिथि को श्रवण नक्षत्र पड़ने के कारण इस व्रत का नाम श्रवण द्वादशी पड़ा है। श्रीमद्भागवत के अनुसार इस तिथि पर भगवान वामन का प्राकट्य हुआ था।

जैन समुदाय में श्रवण द्वादशी व्रत का माहात्म्य बहुत अधिक माना गया है। इस व्रत पर सुहागिन महिलाएं अपने अखंड सुहाग तथा संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत रखकर मंगल-कामना करती हैं। जैन धर्म में इस व्रत को 12 वर्ष तक विधिपूर्वक किया जाता है तथा उसके उपरांत इसका उद्यापन किया जाता है।

इस दिन भगवान वासुपूज्य की पूजा, अभिषेक, स्तुति के साथ-साथ उनका मंत्र- ‘ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ब्लूं श्रीवासुपूज्य जिनेन्द्राय नम: स्वाहा’ अथवा ‘ॐ ह्रीं श्री वासुपूज्य-जिनेन्द्राय नम:’ का जाप करने का महत्व है, वहीं हिन्दू धार्मिक पुराणों तथा मान्यताओं के अनुसार इस दिन भक्तों को व्रत-उपवास करके भगवान वामन की स्वर्ण प्रतिमा बनवाकर पंचोपचार सहित पूजा करनी चाहिए।

Additional information

Number of Days

Number of Pandits

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Swarana Dwadeshi Vrat”

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *