Puja

Mukta Maran Saptami Vrat

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Description

भाद्रपद माह की शुक्ल सप्तमी को मुक्ताभरण संतान सप्तमी का व्रत रखा जाता है। इस दिन स्त्रियांं अपनी संतान की लंबी आयु व अच्छे स्वास्थ्य के लिए इस व्रत को रखती हैं। इस वर्ष यह व्रत 8 सितंबर, दिन गुरुवार, 2016 को मनाया जाएगा।

सुबह सवेरे स्नानादि से निबटकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा करते हैं। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा की जाती है और प्रार्थना की जाती है कि उनकी संतान दीर्घायु प्राप्त करे। शिव भगवान को कलावा अर्पित करते हैं और कथा सुनने के समय इस कलावे को हाथ में बांध लेते हैं।

संध्या समय में खीर, पुए बनाकर नेवैद्य अर्पित किया जाता है। दिन भर निराहार रहकर संध्या समय में भोजन करते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार भगवान श्रीकृष्ण जी, युधिष्ठिर को बताते हैं कि लोमेश ॠषि एक बार मथुरा आए तब मेरे माता-पिता, देवकी व वासुदेव जी ने उनका आदर-सत्कार किया। भक्तिपूर्ण भाव से की गई उनकी सेवा से प्रसन्न होकर लोमेश ॠषि उन्हें कंस द्वारा मारी गई संतान के शोक से उबरने के लिए संतान सप्तमी व्रत करने को कहते हैं। उसी समय से इस व्रत को संतान की रक्षा के लिए किया जाने लगा।

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सुबह सवेरे स्नानादि से निबटकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा करते हैं। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा की जाती है और प्रार्थना की जाती है कि उनकी संतान दीर्घायु प्राप्त करे। शिव भगवान को कलावा अर्पित करते हैं और कथा सुनने के समय इस कलावे को हाथ में बांध लेते हैं।

संध्या समय में खीर, पुए बनाकर नेवैद्य अर्पित किया जाता है। दिन भर निराहार रहकर संध्या समय में भोजन करते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार भगवान श्रीकृष्ण जी, युधिष्ठिर को बताते हैं कि लोमेश ॠषि एक बार मथुरा आए तब मेरे माता-पिता, देवकी व वासुदेव जी ने उनका आदर-सत्कार किया। भक्तिपूर्ण भाव से की गई उनकी सेवा से प्रसन्न होकर लोमेश ॠषि उन्हें कंस द्वारा मारी गई संतान के शोक से उबरने के लिए संतान सप्तमी व्रत करने को कहते हैं। उसी समय से इस व्रत को संतान की रक्षा के लिए किया जाने लगा।

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