Puja
Description
पंचक का नाम सुनते ही सनातन धर्म को मानने वाले,वैदिक ज्योतिष के समर्थक सतर्क हो जाते हैं। उस पर उनके परिवार में कोई बीमार हो, बचने की उम्मीद न हो तो वह भगवान से यही मनाते हैं कि-हे प्रभु, पंचक में इनकी मृत्यु न हो। अगर हो गई तो ये अपने साथ परिवार के चार सदस्यों को ओर ले जाएगा।
जनसाधारण के मन में इसे लेकर गहरा डर बैठा हुआ है। अब जानते हैं कि यह कैसे बनता है? पंचक अर्थात्ा पांच नक्षत्रों का समूह-धनिष्ठा के स्वामी मंगल, शतभिषा के स्वामी राहू, पूर्वाभाद्रपद के बृहस्पति, उत्तराभाद्रपद के शनि और रेवती के स्वामी बुध आदि से बनता है।
पंचक में शामिल सभी नक्षत्र मृत्यु आदि में अद्भुत माने गए हैं। किसी सनातन धर्म को मनाने वाले के यहां जब मृत्यु होती है उसके यहां गरुड़ पुराण का पाठ मृतक को शांति प्रदान करने और शोकाकुल परिवार का दुख दूर करने के लिए किया जाता है। इसमें परिवार के सभी सदस्य और नजदीकी रिश्तेदार शामिल होते हैं। अमूमन 8 दिन चलने वाली यह कथा अब समय के अभाव के कारण एक दिन की हो गई है।
उसी गरुड़ पुराण से हमारा पंचक से उत्पन्न डर भी दूर होता है। इसमें साफ-साफ लिखा है कि अगर पंचक में किसी की मृत्यु हो जाए तो उसमें कुछ सावधानियां बरतना चाहिए। सबसे पहले तो दाह-संस्कार संबंधित नक्षत्र के मंत्र से आहुति देकर नक्षत्र के मध्यकाल में किया जा सकता है।
विधि विधान से की गई आहुति पुण्यफल प्रदान करती हैं। साथ ही अगर संभव हो दाह संस्कार तीर्थस्थल में किया जाए तो उत्तम गति मिलती है।
Additional information
| Number of Days | |
|---|---|
| Number of Pandits |
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पंचक का नाम सुनते ही सनातन धर्म को मानने वाले,वैदिक ज्योतिष के समर्थक सतर्क हो जाते हैं। उस पर उनके परिवार में कोई बीमार हो, बचने की उम्मीद न हो तो वह भगवान से यही मनाते हैं कि-हे प्रभु, पंचक में इनकी मृत्यु न हो। अगर हो गई तो ये अपने साथ परिवार के चार सदस्यों को ओर ले जाएगा।
जनसाधारण के मन में इसे लेकर गहरा डर बैठा हुआ है। अब जानते हैं कि यह कैसे बनता है? पंचक अर्थात्ा पांच नक्षत्रों का समूह-धनिष्ठा के स्वामी मंगल, शतभिषा के स्वामी राहू, पूर्वाभाद्रपद के बृहस्पति, उत्तराभाद्रपद के शनि और रेवती के स्वामी बुध आदि से बनता है।
पंचक में शामिल सभी नक्षत्र मृत्यु आदि में अद्भुत माने गए हैं। किसी सनातन धर्म को मनाने वाले के यहां जब मृत्यु होती है उसके यहां गरुड़ पुराण का पाठ मृतक को शांति प्रदान करने और शोकाकुल परिवार का दुख दूर करने के लिए किया जाता है। इसमें परिवार के सभी सदस्य और नजदीकी रिश्तेदार शामिल होते हैं। अमूमन 8 दिन चलने वाली यह कथा अब समय के अभाव के कारण एक दिन की हो गई है।
उसी गरुड़ पुराण से हमारा पंचक से उत्पन्न डर भी दूर होता है। इसमें साफ-साफ लिखा है कि अगर पंचक में किसी की मृत्यु हो जाए तो उसमें कुछ सावधानियां बरतना चाहिए। सबसे पहले तो दाह-संस्कार संबंधित नक्षत्र के मंत्र से आहुति देकर नक्षत्र के मध्यकाल में किया जा सकता है।
विधि विधान से की गई आहुति पुण्यफल प्रदान करती हैं। साथ ही अगर संभव हो दाह संस्कार तीर्थस्थल में किया जाए तो उत्तम गति मिलती है।
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