Puja
Description
विवाह पश्चात सभी गृहस्थ दंपति की यह चिर-अभिलाषा रहती है कि उनके यहां सुसंतति का जन्म हो। उन्हें सृजन का सौभाग्य प्राप्त हो तथा सांसारिक जीवन में माता-पिता होने का गौरव प्राप्त हो। आचार-शास्त्र के प्रणेता महाराज मनु ने भी संतान प्राप्ति की इच्छा को तीन नैसर्गिक इच्छाओं में से एक माना है तथा संतान प्राप्ति को पूर्व जन्मों के कर्मों का सुफल माना है। नि:संतान होना किसी दंपति के लिए अपार मानसिक पीड़ा का कारण बन जाता है। होता यह है कि कई बार बात बनते-बनते बिगड़ जाती है। ऐसे में जरूरत होती है किसी सहारे की। ईश्वर अनुग्रह, गुरु कृपा, तंत्र-मंत्र-यंत्र के प्रयोग, कोई अनुष्ठान या व्रत-उपवास, ये ऐसे ही सहारे हैं जो मंजिल के करीब पहुंची गाड़ी को धकेल कर मंजिल तक पहुंचा देते हैं। आईए जानतें है एसे ही कुछ सरल उपाय, जिससे संतान प्राप्ति का सुख मिल सकता है।
Additional information
| Number of Days | |
|---|---|
| Number of Pandits |
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विवाह पश्चात सभी गृहस्थ दंपति की यह चिर-अभिलाषा रहती है कि उनके यहां सुसंतति का जन्म हो। उन्हें सृजन का सौभाग्य प्राप्त हो तथा सांसारिक जीवन में माता-पिता होने का गौरव प्राप्त हो। आचार-शास्त्र के प्रणेता महाराज मनु ने भी संतान प्राप्ति की इच्छा को तीन नैसर्गिक इच्छाओं में से एक माना है तथा संतान प्राप्ति को पूर्व जन्मों के कर्मों का सुफल माना है। नि:संतान होना किसी दंपति के लिए अपार मानसिक पीड़ा का कारण बन जाता है। होता यह है कि कई बार बात बनते-बनते बिगड़ जाती है। ऐसे में जरूरत होती है किसी सहारे की। ईश्वर अनुग्रह, गुरु कृपा, तंत्र-मंत्र-यंत्र के प्रयोग, कोई अनुष्ठान या व्रत-उपवास, ये ऐसे ही सहारे हैं जो मंजिल के करीब पहुंची गाड़ी को धकेल कर मंजिल तक पहुंचा देते हैं। आईए जानतें है एसे ही कुछ सरल उपाय, जिससे संतान प्राप्ति का सुख मिल सकता है।
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