Puja
Description
* हमारे ऋषि महर्षियों ने हजारो साल पहले ही संतान प्राप्ति के कुछ नियम और सयम बताये है ,संसार की उत्पत्ति पालन और विनाश का क्रम पृथ्वी पर हमेशा से चलता रहा है,और आगे भी चलता रहेगा। इस क्रम के अन्दर पहले जड चेतन का जन्म होता है,फ़िर उसका पालन होता है और समयानुसार उसका विनास होता है।
* प्रत्येक दम्पति चाहता हैं कि उसके कम से कम एक पुत्र अवस्य हो | पुत्र कि चाह में अनेक दम्पति कई कन्याओ को जन्म देते रहते हैं और पुत्र कि चाह में अपने परिवार को बढ़ाते चले जाते हैं |
* जिस प्रकार धरती पर समय पर बीज का रोपड किया जाता है,तो बीज की उत्पत्ति और उगने वाले पेड का विकास सुचारु रूप से होता रहता है,और समय आने पर उच्चतम फ़लों की प्राप्ति होती है,अगर वर्षा ऋतु वाले बीज को ग्रीष्म ऋतु में रोपड कर दिया जावे तो वह अपनी प्रकृति के अनुसार उसी प्रकार के मौसम और रख रखाव की आवश्यकता को चाहेगा,और नही मिल पाया तो वह सूख कर खत्म हो जायेगा,इसी प्रकार से प्रकृति के अनुसार पुरुष और स्त्री को गर्भाधान का कारण समझ लेना चाहिये। जिनका पालन करने से आप तो संतानवान होंगे ही आप की संतान भी आगे कभी दुखों का सामना नहीं करेगा…!
* निराश दम्पतियों के लिए टोने – टोटको के साथ हे दर्ज़नो औषधिया भी यहाँ दी जा रही हैं | इनमे से अधिकांश औषधियों का चयन प्राचीन ग्रंथो से किया गया हैं और वैद्यों एवं प्रयोगकर्ता इन्हें पूर्ण सफल और अनुभव सिद्ध भी मानते हैं | कुछ मंत्रो के विधान से भी और निष्ठां पूर्वक किया गया ब्रत भी फलदायी होता है …!
Additional information
| Number of Days | |
|---|---|
| Number of Pandits |
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* हमारे ऋषि महर्षियों ने हजारो साल पहले ही संतान प्राप्ति के कुछ नियम और सयम बताये है ,संसार की उत्पत्ति पालन और विनाश का क्रम पृथ्वी पर हमेशा से चलता रहा है,और आगे भी चलता रहेगा। इस क्रम के अन्दर पहले जड चेतन का जन्म होता है,फ़िर उसका पालन होता है और समयानुसार उसका विनास होता है।
* प्रत्येक दम्पति चाहता हैं कि उसके कम से कम एक पुत्र अवस्य हो | पुत्र कि चाह में अनेक दम्पति कई कन्याओ को जन्म देते रहते हैं और पुत्र कि चाह में अपने परिवार को बढ़ाते चले जाते हैं |
* जिस प्रकार धरती पर समय पर बीज का रोपड किया जाता है,तो बीज की उत्पत्ति और उगने वाले पेड का विकास सुचारु रूप से होता रहता है,और समय आने पर उच्चतम फ़लों की प्राप्ति होती है,अगर वर्षा ऋतु वाले बीज को ग्रीष्म ऋतु में रोपड कर दिया जावे तो वह अपनी प्रकृति के अनुसार उसी प्रकार के मौसम और रख रखाव की आवश्यकता को चाहेगा,और नही मिल पाया तो वह सूख कर खत्म हो जायेगा,इसी प्रकार से प्रकृति के अनुसार पुरुष और स्त्री को गर्भाधान का कारण समझ लेना चाहिये। जिनका पालन करने से आप तो संतानवान होंगे ही आप की संतान भी आगे कभी दुखों का सामना नहीं करेगा…!
* निराश दम्पतियों के लिए टोने – टोटको के साथ हे दर्ज़नो औषधिया भी यहाँ दी जा रही हैं | इनमे से अधिकांश औषधियों का चयन प्राचीन ग्रंथो से किया गया हैं और वैद्यों एवं प्रयोगकर्ता इन्हें पूर्ण सफल और अनुभव सिद्ध भी मानते हैं | कुछ मंत्रो के विधान से भी और निष्ठां पूर्वक किया गया ब्रत भी फलदायी होता है …!
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