Kokila Vrat
शास्त्रों के अनुसार यह व्रत पहली बार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए किया था। पार्वती रूप में जन्म लेने से पहले पार्वती कोयल बनकर दस हजार सालों तक नंदन वन में भटकती रही। शाप मुक्त होने के बाद पार्वती ने कोयल की पूजा की इससे भगवान शिव प्रसन्न […]
शास्त्रों के अनुसार यह व्रत पहली बार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए किया था। पार्वती रूप में जन्म लेने से पहले पार्वती कोयल बनकर दस हजार सालों तक नंदन वन में भटकती रही। शाप मुक्त होने के बाद पार्वती ने कोयल की पूजा की इससे भगवान शिव प्रसन्न […]
Kokila Vrat
शास्त्रों के अनुसार यह व्रत पहली बार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए किया था। पार्वती रूप में जन्म लेने से पहले पार्वती कोयल बनकर दस हजार सालों तक नंदन वन में भटकती रही। शाप मुक्त होने के बाद पार्वती ने कोयल की पूजा की इससे भगवान शिव प्रसन्न […]
शास्त्रों के अनुसार यह व्रत पहली बार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए किया था। पार्वती रूप में जन्म लेने से पहले पार्वती कोयल बनकर दस हजार सालों तक नंदन वन में भटकती रही। शाप मुक्त होने के बाद पार्वती ने कोयल की पूजा की इससे भगवान शिव प्रसन्न […]
Kushmaandi Vrat
नवरात्रि के चतुर्थ दिन, मां कूष्मांडा जी की पूजा की जाती है। यह शक्ति का चौथा स्वरूप है, जिन्हें सूर्य के समान तेजस्वी माना गया है। मां के स्वरूप की व्याख्या कुछ इस प्रकार है, देवी कुष्मांडा व उनकी आठ भुजाएं हमें कर्मयोगी जीवन अपनाकर तेज अर्जित करने की प्रेरणा देती हैं, उनकी मधुर मुस्कान […]
नवरात्रि के चतुर्थ दिन, मां कूष्मांडा जी की पूजा की जाती है। यह शक्ति का चौथा स्वरूप है, जिन्हें सूर्य के समान तेजस्वी माना गया है। मां के स्वरूप की व्याख्या कुछ इस प्रकार है, देवी कुष्मांडा व उनकी आठ भुजाएं हमें कर्मयोगी जीवन अपनाकर तेज अर्जित करने की प्रेरणा देती हैं, उनकी मधुर मुस्कान […]
Kushmaandi Vrat
नवरात्रि के चतुर्थ दिन, मां कूष्मांडा जी की पूजा की जाती है। यह शक्ति का चौथा स्वरूप है, जिन्हें सूर्य के समान तेजस्वी माना गया है। मां के स्वरूप की व्याख्या कुछ इस प्रकार है, देवी कुष्मांडा व उनकी आठ भुजाएं हमें कर्मयोगी जीवन अपनाकर तेज अर्जित करने की प्रेरणा देती हैं, उनकी मधुर मुस्कान […]
नवरात्रि के चतुर्थ दिन, मां कूष्मांडा जी की पूजा की जाती है। यह शक्ति का चौथा स्वरूप है, जिन्हें सूर्य के समान तेजस्वी माना गया है। मां के स्वरूप की व्याख्या कुछ इस प्रकार है, देवी कुष्मांडा व उनकी आठ भुजाएं हमें कर्मयोगी जीवन अपनाकर तेज अर्जित करने की प्रेरणा देती हैं, उनकी मधुर मुस्कान […]
Lakshya Pradishana Vrat
इष्टदेव की मूर्ति (या कहीं-कहीं देवायतन) के चारों ओर वृत्ताकार इस प्रकार घूमना जिसमें देव या मंदिर अपने दक्षिण भाग में रहे, प्रदक्षिणा कहलाता है। यह प्रदक्षिणा (नमस्कार के साथ) एक ‘उपचार’ (षोडश उपचारों में अन्यतम) माना जाता है, ऐसा बहुतों का मत है। प्रदक्षिणा के अंत में प्रणाम अवश्य करना चाहिये, बहुतों का मत […]
इष्टदेव की मूर्ति (या कहीं-कहीं देवायतन) के चारों ओर वृत्ताकार इस प्रकार घूमना जिसमें देव या मंदिर अपने दक्षिण भाग में रहे, प्रदक्षिणा कहलाता है। यह प्रदक्षिणा (नमस्कार के साथ) एक ‘उपचार’ (षोडश उपचारों में अन्यतम) माना जाता है, ऐसा बहुतों का मत है। प्रदक्षिणा के अंत में प्रणाम अवश्य करना चाहिये, बहुतों का मत […]
Lakshya Pradishana Vrat
इष्टदेव की मूर्ति (या कहीं-कहीं देवायतन) के चारों ओर वृत्ताकार इस प्रकार घूमना जिसमें देव या मंदिर अपने दक्षिण भाग में रहे, प्रदक्षिणा कहलाता है। यह प्रदक्षिणा (नमस्कार के साथ) एक ‘उपचार’ (षोडश उपचारों में अन्यतम) माना जाता है, ऐसा बहुतों का मत है। प्रदक्षिणा के अंत में प्रणाम अवश्य करना चाहिये, बहुतों का मत […]
इष्टदेव की मूर्ति (या कहीं-कहीं देवायतन) के चारों ओर वृत्ताकार इस प्रकार घूमना जिसमें देव या मंदिर अपने दक्षिण भाग में रहे, प्रदक्षिणा कहलाता है। यह प्रदक्षिणा (नमस्कार के साथ) एक ‘उपचार’ (षोडश उपचारों में अन्यतम) माना जाता है, ऐसा बहुतों का मत है। प्रदक्षिणा के अंत में प्रणाम अवश्य करना चाहिये, बहुतों का मत […]
Lalita Tripur Sundari Prayog
ललिता माता का मंत्र समस्त सुखों को प्रदान करने वाला मंत्र है। पंचमी तिथि के दिन आदिशक्ति त्रिपुर सुंदरी जगत जननी ललिता माता के दर्शन से मनुष्य के सभी कष्टों का निवारण स्वत: ही हो जाता है। ललिता माता की पूजा-अर्चना एवं व्रत मनुष्य को शक्ति प्रदान करते हैं। प्रतिदिन अथवा पंचमी के दिन ललिता […]
ललिता माता का मंत्र समस्त सुखों को प्रदान करने वाला मंत्र है। पंचमी तिथि के दिन आदिशक्ति त्रिपुर सुंदरी जगत जननी ललिता माता के दर्शन से मनुष्य के सभी कष्टों का निवारण स्वत: ही हो जाता है। ललिता माता की पूजा-अर्चना एवं व्रत मनुष्य को शक्ति प्रदान करते हैं। प्रतिदिन अथवा पंचमी के दिन ललिता […]
Lalita Tripur Sundari Prayog
ललिता माता का मंत्र समस्त सुखों को प्रदान करने वाला मंत्र है। पंचमी तिथि के दिन आदिशक्ति त्रिपुर सुंदरी जगत जननी ललिता माता के दर्शन से मनुष्य के सभी कष्टों का निवारण स्वत: ही हो जाता है। ललिता माता की पूजा-अर्चना एवं व्रत मनुष्य को शक्ति प्रदान करते हैं। प्रतिदिन अथवा पंचमी के दिन ललिता […]
ललिता माता का मंत्र समस्त सुखों को प्रदान करने वाला मंत्र है। पंचमी तिथि के दिन आदिशक्ति त्रिपुर सुंदरी जगत जननी ललिता माता के दर्शन से मनुष्य के सभी कष्टों का निवारण स्वत: ही हो जाता है। ललिता माता की पूजा-अर्चना एवं व्रत मनुष्य को शक्ति प्रदान करते हैं। प्रतिदिन अथवा पंचमी के दिन ललिता […]
Laxmi Yagya
This yagya is for the fulfillment of material desires, and to get divine wisdom. Laxmi, is the adobe of all auspiciousness, beauty, wealth, happiness, fortune, luxury, fertility and power. Participating in this yagya helps you to be happy, healthy, wealty. Laxmi help you to obtain good progeny, and also helps the spiritual aspirants to be […]
This yagya is for the fulfillment of material desires, and to get divine wisdom. Laxmi, is the adobe of all auspiciousness, beauty, wealth, happiness, fortune, luxury, fertility and power. Participating in this yagya helps you to be happy, healthy, wealty. Laxmi help you to obtain good progeny, and also helps the spiritual aspirants to be […]





