विवाह

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    Divaagaman (Gauna)

    शादी विवाह में बहुत सारी रस्में होती हैं, और अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रस्में होती है। उन्ही में से एक रस्म है द्विरागमन की। द्विरागमन का मतलब होता है विदाई करना यानी लड़की को उसके ससुराल विदा करना। बीते समय में द्विरागमन शादी के तुरंत बाद नहीं किया जाता था। लेकिन आजकल द्विरागमन की रस्म […]

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    शादी विवाह में बहुत सारी रस्में होती हैं, और अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रस्में होती है। उन्ही में से एक रस्म है द्विरागमन की। द्विरागमन का मतलब होता है विदाई करना यानी लड़की को उसके ससुराल विदा करना। बीते समय में द्विरागमन शादी के तुरंत बाद नहीं किया जाता था। लेकिन आजकल द्विरागमन की रस्म […]

    Mandap / Tailpujan

    लड़की के विवाह में एक महत्वपूर्ण रस्म है- स्तंभरोपण। विवाह के दिन अच्छे मुहूर्त में 21 हरे बांस लेकर मंडप बनाया जाता है। यह हरा बांस ही स्तंभ होता है। यह प्रथा प्राय: भारत के सभी हिस्सों में देखी जाती थी जो कि अब कम होती जा रही है। मंडप के दक्षिण पश्चिम कोने यानी […]

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    लड़की के विवाह में एक महत्वपूर्ण रस्म है- स्तंभरोपण। विवाह के दिन अच्छे मुहूर्त में 21 हरे बांस लेकर मंडप बनाया जाता है। यह हरा बांस ही स्तंभ होता है। यह प्रथा प्राय: भारत के सभी हिस्सों में देखी जाती थी जो कि अब कम होती जा रही है। मंडप के दक्षिण पश्चिम कोने यानी […]

    Paarigrahan

    हिन्दू धर्म में सद्गृहस्थ की, परिवार निर्माण की जिम्मेदारी उठाने के योग्य शारीरिक, मानसिक परिपक्वता आ जाने पर युवक-युवतियों का विवाह संस्कार कराया जाता है। भारतीय संस्कृति के अनुसार विवाह कोई शारीरिक या सामाजिक अनुबन्ध मात्र नहीं हैं, यहाँ दाम्पत्य को एक श्रेष्ठ आध्यात्मिक साधना का भी रूप दिया गया है। इसलिए कहा गया है […]

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    हिन्दू धर्म में सद्गृहस्थ की, परिवार निर्माण की जिम्मेदारी उठाने के योग्य शारीरिक, मानसिक परिपक्वता आ जाने पर युवक-युवतियों का विवाह संस्कार कराया जाता है। भारतीय संस्कृति के अनुसार विवाह कोई शारीरिक या सामाजिक अनुबन्ध मात्र नहीं हैं, यहाँ दाम्पत्य को एक श्रेष्ठ आध्यात्मिक साधना का भी रूप दिया गया है। इसलिए कहा गया है […]

    Varvarana / Kanyavarana

    हिन्दू धर्म में; सद्गृहस्थ की, परिवार निर्माण की जिम्मेदारी उठाने के योग्य शारीरिक, मानसिक परिपक्वता आ जाने पर युवक-युवतियों का विवाह संस्कार कराया जाता है। समाज के सम्भ्रान्त व्यक्तियों की, गुरुजनों की, कुटुम्बी-सम्बन्धियों की, देवताओं की उपस्थिति इसीलिए इस धर्मानुष्ठान के अवसर पर आवश्यक मानी जाती है कि दोनों में से कोई इस कत्तर्व्य-बन्धन की […]

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    हिन्दू धर्म में; सद्गृहस्थ की, परिवार निर्माण की जिम्मेदारी उठाने के योग्य शारीरिक, मानसिक परिपक्वता आ जाने पर युवक-युवतियों का विवाह संस्कार कराया जाता है। समाज के सम्भ्रान्त व्यक्तियों की, गुरुजनों की, कुटुम्बी-सम्बन्धियों की, देवताओं की उपस्थिति इसीलिए इस धर्मानुष्ठान के अवसर पर आवश्यक मानी जाती है कि दोनों में से कोई इस कत्तर्व्य-बन्धन की […]